1993-94 में आयुर्वेद घोटाला सुप्रीम कोर्ट में पैरवी को लेकर मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांगएहसान खान ने बलराम यादव के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन प्रकरण में तेजी लाने की उठाई मांग प्रदेश की राजनीति में मचा हड़कंपआजमगढ़। 1993-94 में आयुर्वेद विभाग में हुए करोड़ों के घोटाले के मामले में सुप्रीम कोर्ट में लंबित पैरवी को लेकर पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी एवं समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्य एहसान खान ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है। एहसान खान ने 7 अगस्त को मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा कि तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री बलराम यादव पर आयुर्वेद निदेशक के साथ मिलकर स्वीकृत बजट से कई गुना अधिक धनराशि निकालने का आरोप है। विजिलेंस जांच में घोटाला उजागर होने के बाद 2017 में कुछ लोगों पर कार्यवाही और करीब 16 लाख की रिकवरी भी हुई थी। पत्र के अनुसार, मामला हाईकोर्ट से होते हुए सीबीआई जांच के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। मार्च 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने बलराम यादव को नोटिस जारी किया था, लेकिन 8 वर्ष बीत जाने के बाद भी प्रदेश सरकार के लॉ डिपार्टमेंट द्वारा मामले में प्रभावी पैरवी नहीं की गई है। एहसान खान ने पत्र में आरोप लगाया कि बलराम यादव पर सबूतों से छेड़छाड़ और खाद घोटाले में भी नाम आने की बात सामने आई थी, लेकिन उसमें अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि विजिलेंस की पत्रावली का अवलोकन कर लॉ डिपार्टमेंट को निर्देशित किया जाए और सीबीआई द्वारा की गई पैरवी की जानकारी ली जाए। साथ ही खाद घोटाले की भी जांच कराकर जनता का लूटा गया पैसा ब्याज सहित वसूल किया जाए। एहसान खान ने पत्र की प्रतिलिपि केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह को भी भेजी है।

Byshiv janam

Aug 18, 2026

1993-94 में आयुर्वेद घोटाला सुप्रीम कोर्ट में पैरवी को लेकर मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग
एहसान खान ने बलराम यादव के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन प्रकरण में तेजी लाने की उठाई मांग
प्रदेश की राजनीति में मचा हड़कंप
आजमगढ़। 1993-94 में आयुर्वेद विभाग में हुए करोड़ों के घोटाले के मामले में सुप्रीम कोर्ट में लंबित पैरवी को लेकर पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी एवं समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्य एहसान खान ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है। एहसान खान ने 7 अगस्त को मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा कि तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री बलराम यादव पर आयुर्वेद निदेशक के साथ मिलकर स्वीकृत बजट से कई गुना अधिक धनराशि निकालने का आरोप है। विजिलेंस जांच में घोटाला उजागर होने के बाद 2017 में कुछ लोगों पर कार्यवाही और करीब 16 लाख की रिकवरी भी हुई थी। पत्र के अनुसार, मामला हाईकोर्ट से होते हुए सीबीआई जांच के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। मार्च 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने बलराम यादव को नोटिस जारी किया था, लेकिन 8 वर्ष बीत जाने के बाद भी प्रदेश सरकार के लॉ डिपार्टमेंट द्वारा मामले में प्रभावी पैरवी नहीं की गई है। एहसान खान ने पत्र में आरोप लगाया कि बलराम यादव पर सबूतों से छेड़छाड़ और खाद घोटाले में भी नाम आने की बात सामने आई थी, लेकिन उसमें अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि विजिलेंस की पत्रावली का अवलोकन कर लॉ डिपार्टमेंट को निर्देशित किया जाए और सीबीआई द्वारा की गई पैरवी की जानकारी ली जाए। साथ ही खाद घोटाले की भी जांच कराकर जनता का लूटा गया पैसा ब्याज सहित वसूल किया जाए। एहसान खान ने पत्र की प्रतिलिपि केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह को भी भेजी है।

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