सरायमीर: यौमे आशूरा के अवसर पर शुक्रवार को हज़रत इमाम हुसैन एवं शहीदाने कर्बला की याद में पारंपरिक मातमी जुलूस पूरी अकीदत, अनुशासन और गमगीन माहौल में नगर सहित ग्रामीण क्षेत्र करौली, कमालपुर, निकामुद्दीनपुर, रसूलपुर, बिलहरी इमाम अली, फतेहपुर, कस्बा पुरंदरपुर, ओस्ती, खपड़ा गांव,व बिजहर में निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में अज़ादारों ने काले लिबास पहनकर हिस्सा लिया और नौहाख़्वानी तथा मातम के माध्यम से कर्बला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। ताज़िया, अलम, ज़ुलजनाह व ताबूत के साथ जुलूस अपने निर्धारित मार्ग से होता हुआ विभिन्न इमाम चौकों और प्रमुख मार्गों से गुज़रता हुआ देर शाम सदर इमामबाड़ा (ताज़िया दफनगाह) पहूंचा जहां पर ज़ियारते आशूरा पढ़ने के बाद संपन्न हुआ। रास्ते भर “या हुसैन”, “या अब्बास” की सदाएं गूंजती रहीं।
जुलूस का संचालन करते हुए मोहमद हुसैन सरायमीरी ने कहा कि इमाम हुसैन की शहादत पूरी मानवता के लिए सत्य, न्याय, धैर्य और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष का संदेश है। उन्होंने कहा कि कर्बला का वाक्या केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं, बल्कि हर दौर के इंसान के लिए हक़ और इंसाफ़ की राह पर चलने की प्रेरणा है उन्होंने लोगों से आपसी भाईचारा, अमन-चैन और इंसानियत की सेवा का संदेश अपनाने की अपील की। जुलूस में अंजुमन अज़ाए हुसैन निकामुद्दीनपुर अंजुमन गूंचये अब्बासिया कोरौली अंजुमन तनज़ीमे हुसैनी सरायमीर ने ज़ंजीर से मातम किया

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