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जंग बहादुर का आरोप है कि चकबंदी के समय से जिस रास्ते का इस्तेमाल होता आ रहा है, उसे बदलकर गाटा संख्या 73 में जबरन नया रास्ता बनाए जाने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि गाटा संख्या 73 में उनका पुश्तैनी कुआं भी मौजूद है, जिस पर मिट्टी डालकर उसे पाटने और उसके ऊपर से रास्ता निकालने का प्रयास किया जा रहा है।
जंग बहादुर के मुताबिक, मामले में न्यायालय से स्टे भी मिलता रहा है और हर महीने इसकी अवधि बढ़ रही है, जबकि मामले का अंतिम निस्तारण अभी नहीं हुआ है। इसके बावजूद कथित तौर पर मौके पर मिट्टी डालकर रास्ता बनाए जाने का काम कराया जा रहा है।
पीड़ित पक्ष ने प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा न्यायालय में विचाराधीन मामले का निस्तारण होने तक किसी भी प्रकार का निर्माण या रास्ते में बदलाव नहीं किए जाने की मांग की है।
वहीं, पूरे मामले में दूसरे पक्ष का क्या कहना है और प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई की गई है, यह अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। मामले की वास्तविक स्थिति न्यायालय के निर्णय और राजस्व अभिलेखों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

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