मोहम्मद खालिद खान की रिपोर्ट

लेकिन स्कूल में कभी बच्चे दिखते नहीं है और स्कूल में चार मास्टर मौजूद हैं जो सरकारी स्कूल के कारण गांव में कभी बच्चों को लेकर पढ़ाई और शिक्षा को लेकर गांव में बच्चों को कभी दबाव नहीं बनाए और रजिस्टर मेंटेन होना जरूरी समझ ते हैं अगर प्राइवेट स्कूल होता तो गांव गांव जाकर लोगों से संपर्क करते सरकारी मास्टर होने के कारण कभी स्कूल से बाहर नहीं जाते ना गांव के किसी भी व्यक्ति से संपर्क करके बच्चों को शिक्षा के बारे में बताते ना एडमिशन करते मास्टरों को सिर्फ सरकारी वेतन से मतलब है और बच्चों से कोई मतलब नहीं पढ़े या ना पढ़े सिर्फ स्कूल में मास्टर आकर अपनी टाइम तक हाजिरी देकर घर चले जाते हैं उन्हें गांव के या आसपास के बच्चों से कोई मतलब नहीं हैऔर गांव के किसी व्यक्ति द्वारा सवाल करने पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हैं और कभी भी बच्चे स्कूल में दिखते नहीं और मास्टर को कोई फर्क नहीं पड़ता उसी को लेकर
राकेश कुमार यादव
पवन कुमार मौर्य
आयुष पांडे
ज्ञानचंद पांडे
चंद्रशेखर पांडे
चंदन मिश्रा
अवधेश दुबे
रिशु दुबे ,मुकेश मौर्य , बलजोर मौर्य और आदि लोग मौजूद रहे

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed